Saturday, August 16, 2014

Happy इंडिपेंडेंस डे

सरफरोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
देखना है जोर कितना, बाजु-ए-कातिल में है?
वक़्त आने दे बता, देंगे तुझे ऐ आसमां!
हम अभी से क्या बताएं, क्या हमारे दिल में है?
काश बिस्मिल आज आते, तुम भी हिन्दोस्तान में;
देखते यह मुल्क कितना, ‘टेन्शन’ में, ‘थ्रिल’ में है।
आज का लड़का ये कहता’ हम तो बिस्मिल थक गये;
अपनी आज़ादी तो भैया! लड़कियों के तिल में है।
आज के जलसों में बिस्मिल, एक गूंगा गा रहा;
और बहरों का वो रेला, नाचता महफ़िल में है।
हाथ की खादी बनाने, का ज़माना लद गया;
आज तो चड्ढी भी सिलती, इंग्लिशों की मिल में है।
वक्त आने दे बता, देंगे तुझे ऐ आसमां!
हम अभी से क्या बताएं, क्या हमारे दिल में है?
सरफरोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
देखना है जोर कितना, बाजु-ए-कातिल में है?

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कवि की बहुत ही अच्छी पंक्तियां-
यहां सब कुछ बिकता है , 
दोस्तों रहना जरा संभाल के !!!
बेचने वाले हवा भी बेच देते है ,
गुब्बारों में डाल के !!!
सच बिकता है , झूठ बिकता है,
बिकती है हर कहानी !!!
तीन लोक में फैला है ,
फिर भी बिकता है बोतल में पानी!!!
कभी फूलों की तरह मत जीना,
जिस दिन खिलोगे... 
टूट कर बिखर जाओगे ।
जीना है तो पत्थर की तरह जियो;
जिस दिन तराशे गए... 
"भगवान" बन जाओगे।।


 

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